
Anjaneya University रायपुर। जल और समुद्री संसाधनों का बेहतर उपयोग, पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक विकास के बीच संतुलन किस तरह बनाया जा सकता है, इस पर आंजनेय यूनिवर्सिटी में दो दिनों तक विशेषज्ञों ने मंथन किया। यूनिवर्सिटी के फैकल्टी ऑफ साइंस के मैथमेटिक्स और जूलॉजी विभाग की ओर से एआईसीटीई प्रायोजित अटल कार्यक्रम आयोजित किया गया। Anjaneya University
कार्यक्रम की थीम “ब्लू इकोनॉमी : ए पाथवे टू सस्टेनेबल डेवलपमेंट एंड इंडियाज़ इकोनॉमिक ग्रोथ” रही। इसमें जल एवं समुद्री संसाधनों के संरक्षण, नवीकरणीय समुद्री ऊर्जा, पर्यावरणीय सुरक्षा और सतत विकास जैसे विषयों पर विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों एवं प्रतिभागियों के साथ अपने अनुभव और विचार साझा किए।
कुलपति डॉ. टी. रामाराव ने बताया ब्लू इकोनॉमी का महत्व
कार्यक्रम में कुलपति डॉ. टी. रामाराव ने कहा कि ब्लू इकोनॉमी सतत विकास और भारत की आर्थिक प्रगति के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी है। जल और समुद्री संसाधनों का संरक्षण केवल पर्यावरण से जुड़ा विषय नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध भविष्य की आर्थिक संभावनाओं से भी है।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि डॉ. एल. के. परगनिहा और गेस्ट ऑफ ऑनर डॉ. एन. मरिमुथु सहित डायरेक्टर जनरल डॉ. बी. सी. जैन, डायरेक्टर डॉ. जयेंद्र नारंग, डायरेक्टर एकेडमिक्स डॉ. संध्या वर्मा और रजिस्ट्रार डॉ. रुपाली चौधरी मौजूद रहे।
कोरल रीफ से लेकर सतत मत्स्य पालन तक हुई चर्चा
कार्यक्रम के पहले दिन विशेषज्ञ सत्रों में ब्लू इकोनॉमी के अलग-अलग पहलुओं पर चर्चा हुई। डॉ. एन. मरिमुथु ने कोरल रीफ संरक्षण और तटीय पारिस्थितिकी तंत्र की स्थिरता पर जानकारी दी।
वहीं डॉ. राजेश कुमार राय ने नवीकरणीय समुद्री ऊर्जा, डॉ. रंजू गुप्ता ने जल संसाधन प्रबंधन और डॉ. पार्वती पटेल ने सतत मत्स्य पालन से जुड़े विषयों पर व्याख्यान दिया।
इन सत्रों में जल और समुद्री संसाधनों के संरक्षण के साथ उनके जिम्मेदार इस्तेमाल और लंबे समय तक टिकाऊ विकास की जरूरत पर जोर दिया गया।
दूसरे दिन जल संरक्षण और पर्यावरण पर फोकस
कार्यक्रम के दूसरे दिन श्री प्रहलाद ने जल संरक्षण एवं प्रबंधन और सतत विकास के बीच संबंध पर चर्चा की। इसके बाद डॉ. राज किशोर चौधरी ने सतत पर्यावरण एवं विकास पर विचार रखे।
प्रो. अनुभूति कौशले ने जल स्थिरता और पर्यावरण संरक्षण के मुद्दों पर प्रतिभागियों से संवाद किया। अंतिम तकनीकी सत्र में एस. के. राजीव नायर, डीन, सीएसआईटी, दुर्ग ने “बीकम द बेस्ट वर्जन ऑफ योरसेल्फ” विषय पर इंटरैक्टिव और प्रेरणादायी सत्र लिया। इसमें प्रतिभागियों ने भी सक्रिय रूप से हिस्सा लिया।
विद्यार्थियों की लोक नृत्य प्रस्तुति ने बढ़ाया उत्साह
कार्यक्रम के समापन समारोह में बीएससी के विद्यार्थियों ने पारंपरिक लोक नृत्य की प्रस्तुति दी। विद्यार्थियों की सांस्कृतिक प्रस्तुति ने अकादमिक कार्यक्रम के माहौल को उत्साह और उमंग से भर दिया।
अतिथियों, शिक्षकों और प्रतिभागियों ने विद्यार्थियों की प्रस्तुति की सराहना की। इसके साथ ही दो दिनों में हुए अकादमिक सत्रों और विशेषज्ञों के मार्गदर्शन का समापन किया गया।
ब्लू इकोनॉमी के कई पहलुओं को समझने का अवसर
दो दिवसीय कार्यक्रम में ब्लू इकोनॉमी को केवल समुद्री संसाधनों तक सीमित न रखते हुए इसके पर्यावरणीय, वैज्ञानिक, आर्थिक और सामाजिक पहलुओं पर चर्चा हुई। कोरल रीफ संरक्षण, समुद्री ऊर्जा, जल प्रबंधन, सतत मत्स्य पालन, जल संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा जैसे विषयों ने प्रतिभागियों को इस क्षेत्र की व्यापक संभावनाओं को समझने का अवसर दिया।
कार्यक्रम का समापन वैलिडिक्टरी सत्र और सांस्कृतिक प्रस्तुति के साथ हुआ।










