मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के सख्त निर्देश: सेवानिवृत्ति के दिन ही मिलेगा पेंशन-ग्रेच्युटी समेत पूरा भुगतान

रायपुर, 10 अगस्त 2026। महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने विभागीय कर्मचारियों के सेवानिवृत्ति प्रकरणों को लेकर बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। मंत्री ने निर्देश दिए हैं कि सेवानिवृत्त होने वाले अधिकारी-कर्मचारियों के सभी जरूरी प्रकरणों का समयबद्ध तरीके से निपटारा सेवानिवृत्ति की तारीख से पहले किया जाए, ताकि उन्हें सेवानिवृत्ति के दिन ही उनके सभी वैधानिक स्वत्व और भुगतान मिल सकें।
पेंशन, ग्रेच्युटी और अवकाश नकदीकरण का समय पर निराकरण
मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने प्रमुख सचिव, संचालक समाज कल्याण और संचालक महिला एवं बाल विकास को निर्देशित किया है कि आगामी सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों के प्रकरणों की पहले से तैयारी की जाए।
उन्होंने स्पष्ट किया कि सेवानिवृत्ति आदेश, पेंशन, ग्रेच्युटी, अवकाश नकदीकरण और अन्य देय स्वत्वों से संबंधित सभी प्रक्रियाएं सेवानिवृत्ति की तारीख से पहले पूरी कर ली जाएं।
दस्तावेजों में देरी पर जताई नाराजगी
मंत्री ने कहा कि कई बार न मांग प्रमाण पत्र, जांच प्रमाण पत्र, सेवा सत्यापन और अन्य आवश्यक दस्तावेजों की प्रक्रिया में देरी के कारण कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति के बाद अपने ही अधिकारों के लिए कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। प्रशासनिक अनुमोदन के लिए प्रकरण देर से भेजे जाने से भी भुगतान प्रभावित होता है।
उन्होंने अधिकारियों को इस तरह की लापरवाही को गंभीरता से लेने और सभी स्तरों पर समयबद्ध कार्यप्रणाली अपनाने के निर्देश दिए।
चेकलिस्ट से होगी हर प्रकरण की मॉनिटरिंग
मंत्री ने शासन स्तर से लेकर विभागाध्यक्ष और अधीनस्थ कार्यालयों तक चेकलिस्ट आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम लागू करने को कहा है। प्रत्येक कार्यालय में आने वाले समय में सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों की सूची तैयार की जाएगी और उनके प्रकरणों की नियमित समीक्षा होगी।
इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि कोई भी सेवानिवृत्ति प्रकरण लंबित न रहे और कर्मचारी को समय पर उसका अधिकार मिल सके।
“सम्मानजनक विदाई के साथ मिले सभी अधिकार”
श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि सेवानिवृत्ति केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि कर्मचारी के जीवन का महत्वपूर्ण पड़ाव है। वर्षों तक शासन की सेवा करने वाले अधिकारी-कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति के समय किसी प्रकार की प्रशासनिक परेशानी नहीं होनी चाहिए।
उन्होंने अधिकारियों को मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए कि प्रत्येक कर्मचारी को सम्मानजनक विदाई के साथ उसके सभी वैधानिक स्वत्व समय पर प्राप्त हों।









