CG High Court: चीफ जस्टिस कृष्ण राम महापात्र के पहले दिन दो बड़ी योजनाओं की सुनवाई, सरकार से मांगा जवाब
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के नवनियुक्त चीफ जस्टिस कृष्ण राम महापात्र के कार्यभार संभालने के बाद दो महत्वपूर्ण योजनाओं से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई हुई। चरणपादुका योजना की निविदा और RTE Admission से जुड़े मामले में राज्य सरकार से जवाब और आवश्यक जानकारी मांगी गई है।

CG High Court: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के नवनियुक्त चीफ जस्टिस कृष्ण राम महापात्र के कार्यभार संभालने के बाद कोर्ट में दो महत्वपूर्ण योजनाओं के क्रियान्वयन से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई हुई। इनमें एक मामला राज्य सरकार की चरणपादुका योजना से जुड़ा है, जबकि दूसरा केंद्र सरकार की महत्वपूर्ण शिक्षा का अधिकार यानी RTE योजना में एडमिशन से संबंधित है।
दोनों मामलों में राज्य शासन से जवाब और आवश्यक जानकारी पेश करने के निर्देश दिए गए हैं।
चरणपादुका योजना की टेंडर शर्तों को हाईकोर्ट में चुनौती
राज्य सरकार ने तेंदूपत्ता संग्रह करने वाले आदिवासी संग्राहकों को चरणपादुका उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है। योजना के तहत महिला और पुरुष दोनों तेंदूपत्ता संग्राहकों को चरणपादुका देने की व्यवस्था है।
योजना को लागू करने के लिए राज्य सहकारी समिति की ओर से निविदा जारी की गई। निविदा में निर्धारित कुछ शर्तों को चुनौती देते हुए चारणपादुका इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड ने हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की है।
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार को नोटिस जारी कर जवाब पेश करने का निर्देश दिया।
क्या है चरणपादुका योजना का मामला?
याचिका में निविदा की शर्तों को लेकर आपत्ति जताई गई है। याचिकाकर्ता कंपनी की ओर से मामले की तात्कालिकता को कोर्ट के सामने रखा गया।
आदेश-पत्र के मुताबिक, मामले में पहले भी सुनवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ी थी। याचिकाकर्ता की ओर से रिट याचिका के मेमो में आवश्यक संशोधन की अनुमति भी मांगी गई थी।
कोर्ट ने संशोधन आवेदन स्वीकार करते हुए आवश्यक संशोधन करने का निर्देश दिया था।
समयाभाव के कारण पहले नहीं हो सकी थी सुनवाई
आदेश-पत्र में दर्ज जानकारी के अनुसार, मामले को पहले सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया था, लेकिन समयाभाव के कारण सुनवाई नहीं हो सकी।
हालांकि, याचिकाकर्ता के अधिवक्ताओं की दलीलों और मामले की बताई गई तात्कालिकता को देखते हुए कोर्ट ने इसे अगले दिन सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया था।
इसके बाद तय समय के अनुसार मामले को डिवीजन बेंच के समक्ष सुनवाई के लिए लिया गया।
RTE Admission मामले में भी सरकार से मांगी जानकारी
दूसरा महत्वपूर्ण मामला शिक्षा के अधिकार अधिनियम (RTE) के तहत निजी स्कूलों में एडमिशन से जुड़ा है।
भिलाई निवासी सीवी भगवंत राम की ओर से दायर जनहित याचिका में RTE के तहत प्रवेश प्रक्रिया और उसके क्रियान्वयन से जुड़े मुद्दे उठाए गए हैं।
इस मामले में हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार से SOP (Standard Operating Procedure) के संबंध में जानकारी मांगी है।
कोर्ट ने सरकार को इस संबंध में शपथपत्र के साथ जानकारी पेश करने के निर्देश दिए हैं।
दो महत्वाकांक्षी योजनाओं पर कोर्ट की नजर
एक तरफ राज्य सरकार की तेंदूपत्ता संग्राहकों के लिए चरणपादुका योजना है, तो दूसरी तरफ केंद्र की RTE योजना के तहत बच्चों के शिक्षा अधिकार से जुड़ा मामला है।
दोनों मामलों में कोर्ट ने सरकार से जवाब/जानकारी मांगी है। अब अगली सुनवाई में राज्य सरकार की ओर से प्रस्तुत किए जाने वाले जवाब और दस्तावेजों पर आगे की कार्रवाई निर्भर करेगी।
कोर्ट में कौन-कौन हुए पेश?
चरणपादुका योजना से जुड़े मामले में याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता प्रेम गर्ग और डायना बजरंग उपस्थित हुए।
राज्य शासन की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता प्रवीण दास तथा प्रतिवादी क्रमांक-2 की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सुनील ओटवानी के साथ अधिवक्ता सैयद माजिद अली उपस्थित रहे।
CG High Court: अब सरकार के जवाब पर नजर
दोनों मामलों में हाईकोर्ट द्वारा राज्य सरकार से जवाब मांगे जाने के बाद अब अगली सुनवाई में सरकार की ओर से प्रस्तुत किए जाने वाले जवाब, SOP और संबंधित दस्तावेजों पर नजर रहेगी।
खास तौर पर RTE मामले में SOP को लेकर कोर्ट ने शपथपत्र के साथ जानकारी मांगी है, जबकि चरणपादुका योजना में निविदा की शर्तों को लेकर दायर याचिका पर सरकार का पक्ष महत्वपूर्ण होगा।









