200 rupee Coin : राष्ट्रपति मुर्मू आज जारी करेंगी 200 रुपये का स्मारक सिक्का, जानें वजन, डिजाइन और बुकिंग की पूरी जानकारी
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200 rupee Coin रायपुर। छत्तीसगढ़ दौरे पर पहुंच रहीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 22 और 23 अक्टूबर 2026 को राज्य के विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल होंगी। इस दौरान रायपुर स्थित शदाणी दरबार की पंचम पीठाधीश माता साहिब हासी देवी की 200वीं जयंती के अवसर पर 200 रुपये का विशेष स्मारक सिक्का जारी किया जाएगा। इस सिक्के को माता साहिब हासी देवी की आध्यात्मिक और सामाजिक विरासत को सम्मान देने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।
200 रुपये के स्मारक सिक्के की क्या है खासियत?
माता साहिब हासी देवी की 200वीं जयंती के अवसर पर जारी होने वाला यह सिक्का अपने आकार, वजन और धातुओं के मिश्रण के कारण खास है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, सिक्के का वजन 35 ग्राम और व्यास 44 मिलीमीटर होगा। यह गोलाकार होगा और इसमें चार धातुओं का इस्तेमाल किया जाएगा।
सिक्के में धातुओं का अनुपात इस प्रकार बताया गया है:
- चांदी: 50 प्रतिशत
- तांबा: 40 प्रतिशत
- निकल: 5 प्रतिशत
- जस्ता: 5 प्रतिशत
सिक्के पर क्या होगी डिजाइन?
स्मारक सिक्के के एक तरफ भारत का राष्ट्रीय प्रतीक अशोक स्तंभ का सिंह शीर्ष होगा। इसके नीचे ‘सत्यमेव जयते’ अंकित रहेगा।
सिक्के की दूसरी तरफ माता साहिब हासी देवी का चित्र होगा। साथ ही उनका नाम देवनागरी और अंग्रेजी, दोनों लिपियों में लिखा रहेगा। इस तरह सिक्के पर राष्ट्रीय प्रतीक के साथ-साथ सिंधी समाज की आध्यात्मिक परंपरा की झलक भी दिखाई देगी।
कैसे होगी 200 रुपये के सिक्के की बुकिंग?
दी गई जानकारी के अनुसार, भारत सरकार के वित्त मंत्रालय ने इस विशेष सिक्के के 550 पीस तैयार कराए हैं। विमोचन के बाद श्रद्धालु और सिक्का संग्रह करने वाले लोग शदाणी दरबार की विभिन्न इकाइयों के माध्यम से इसकी बुकिंग कर सकेंगे।
हालांकि, बुकिंग की तारीख, कीमत, भुगतान प्रक्रिया और उपलब्धता से संबंधित विस्तृत जानकारी आधिकारिक घोषणा से ही स्पष्ट होगी। स्मारक सिक्के पर अंकित 200 रुपये का मूल्य और उसकी वास्तविक बिक्री कीमत अलग-अलग हो सकती है।
कौन थीं माता साहिब हासी देवी?
माता साहिब हासी देवी का जन्म वर्ष 1826 में सिंध प्रांत के खानपुर महर में हुआ था। उन्हें सिंधी समाज की प्रमुख आध्यात्मिक संतों में गिना जाता है। वे रायपुर स्थित शदाणी दरबार की पंचम पीठाधीश थीं।
बताया जाता है कि वर्ष 1852 में, लगभग 26 वर्ष की आयु में, उन्होंने शदाणी दरबार की पहली महिला पीठाधीश्वर के रूप में जिम्मेदारी संभाली। उन्होंने करीब 57 वर्षों तक धार्मिक और सामाजिक गतिविधियों का नेतृत्व किया।
उनकी 200वीं जयंती पर जारी किया जाने वाला स्मारक सिक्का उनके योगदान और आध्यात्मिक विरासत को याद करने का एक विशेष माध्यम होगा।










